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| Wednesday 20 August, 2008 |
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Ye sham
इंतजार होगा तुम्हारा जल्द ही खतमजब मन मे उतने लगी है उनके लिए उमंग तुम्हारी चाहत होगी जरूर पूरी ना रहेगी अब कोई मनोकामना अधूरी महज कल्पना ही हकीक़त को अंजाम देती है धड़कने ही दिलो की बात समझती है, देखो आया है मन का मित तुम्हारे द्वार जिसका कर रही थी तुम इंतजार, अब आ गयी है ये शाम, आज तुम्हारे जीवन मे अंकुर बनकर, संग उसके पूनम की रात मे, साकार करो अपने सपने तुम उसे अपनाकर, तुम उसे अपनाकर.... तुम उसे अपनाकर.......... तुम उसे अपनाकर.......
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